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Showing posts from November, 2017
हम इलज़ाम से अनजान थे , वो अंजाम से थे बेखबर ... कितना रोये इस दर्द से , उनको क्या थी खबर ... फिर सोचा फैसले को , वक़्त के हवाले छोड़ दें ... उल्फत की इन बेड़ियों को , चलो खुद ही तोड़ दें ... छोड़ दे उन ख्यालों को जो हमे सताते है जो कुरेदते है हर  ज़ख़्म और ताज़े घाव बनाते है नमी नहीं अब इन आँखों में ख़ुशी की दरकार है किसी से क्या लेना मुझे खुद से इतना प्यार है