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मां

ए ज़िन्दगी यूं रुस्वाई न कर  किसी बेटी से उसकी मां की जुदाई न कर  मिलता नहीं रिश्ता ये दोबारा  भटक लो चाहे दर दर  वो आंचल में अपने छुपाती है  हर गम के साये से बचाती है  उसके होने से खुशनुमा रंगीन होती है ज़िन्दगी  वो न हो तो ज़िन्दगी बेरंग हो जाती है  बिगड़ा हर जीवन हो जाता संवर ए ज़िन्दगी यूं रुस्वाई न कर  किसी बेटी से उसकी मां की जुदाई न कर  दीक्षा