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गम - ऐ - ज़िन्दगी

             दर्द सहते है हम फिर भी चुप चाप सह लेते है हर सितम ... ना जानते थे की ज़िन्दगी देती है इतने गम ... हस्ते हुए चले जा रहे है हम  बस यही सोचते है अब की कब होंगी परेशानिया कम। आवाज़ दी पलट कर किस्मत को हमने  पर चोर नहीं दमन मेरा गम ने  जाने कैसा दर्द है जिसने  हम किया है असर की आँखें रहती है नम ... बस यही सोचते है अब की कब होंगी परेशानिया कम। चलते जा रहे है उस रस्ते जिसकी कोई मंजिल नहीं  मंजिल तक पहुंचना है खाकर ठोकर ही सही  टूटना नहीं है थकना नहीं है चलते जाना है  चाहे दे ये ज़िन्दगी जितने मर्जी सितम  बस यही सोचते है अब की कब होंगी परेशानिया कम।
ज़िन्दगी यु ही इतना दर्द देती रही हम सहते रहे चुप चाप बिना कहे कुछ शब्द बस यु ही बहते रहे हमारी आँखों से आंसू और यूं ही हो गये हम निशब्द ज़िन्दगी ने रुख पलती और हम भी टूट गए और हर ख़ुशी के पल हमसे छूट गए बस अब तो चले जा रहे है ज़िन्दगी की इन राहो में  और कर रहे है उम्मीद हस्ते हुए जाये मौत की बाहों में ..
आज ना जाने क्यों अश्क से नाता बनता सा जाता है शायद कुछ खो दिया हमने जिसे दिल चाहता है ज़िन्दगी अधूरी सी लगती है हर दम इस कदर की बस आँखों को चाहत सी बन गई देखेने  को इक नज़र जब जब दिल ने आवाज़ लगाई थी तुझे प्यार का हर दिया हवा से लगता जेसे अब बुझे ज़िन्दगी में जो चाहत किस्मत से आई थी वो तो अब आंसुओ के साए में  छाई  थी मै चलती रही ज़िन्दगी में कदम बडाये बस एक उम्मीद है की अब मंजिल मिल जाए पाने से पहले खोने का डर अब ख़तम हो गया बस ख़ुशी की आस में जीना भी सितम हो गया... दीक्षा ....