अहसास, इस पल का ... एक ज़माना हो गया लिखे हुए , एक पल था जब हर वक़्त शब्द गूंजा करते थे , हम गुनगुनाते थे और शब्द गीत गाते थे लगता है अब कलम भी फ़ना हो गए आज जाने क्यों सब मौन हो गए..... आज ढूंढ़ती हूं खुद को खामोशी में कभी हंसती मुस्कुराया करती थी बोलती इतना थी कि लोग चुप कराते थे आज चाह कर भी बोलने का मन नहीं करता जाने क्या है की हर चीज़ से मन उठ गया जाने क्या थे और आज हम क्या हो गए ...... एक कशिश थी आँखों में सपने थे हज़ार रोज़ टूटे तारों को देखने की रहती थी दरकार अब न सपने हैं और न कोई अरमान रहा जाने कब आख़िरी बार किसी को अपना दर्द कहा आज लगता है खुद टूट के बिखर गए ...... जो कभी खुशियों के खुदा हुआ करते थे आज ग़म के जहां हो गए ....... 😢😥😰😪😭🙏 दीक्षा
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अनाछी: An Unwanted.......
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कितनी बार कहा है तेरी मन मानी नहीं चलेगी , ये घर मेरा है और तुझे मेरे हिसाब से चलना होगा , लड़की है ज्यादा उड़ने की कोशिश मत कर समझी ……. ( रोते रोते सिसकियां लेती आवाज़ें आह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ) चीख चीख कर ज़ोर से डांटने फटकारने का सिलसिला यूं ही चलता रहा और दरवाजे के बाहर तक आ रही आवाज़ें रात 11 बजे तक शांत हुई और बत्ती बुझ गयी। शेर सिंह तो अपनी अक्कड़ और रौब दिखा कर सो गए लेकिन सपनों की चमक की रौशनी को अंधेरे में तब्दील होने के बाद कोई कैसे सो सकता था , तो निराशा में डूबी अनाछी ही थी जो जागती रही और आंसू बहते रहे। अनाछी ....... पहली बार ऐसा नाम सुना था , इतना अनोखा की मतलब समझने के लिए इंटरनेट में खोजा। गूगल में मतलब भी जानने की कोशिश की पर कोई लाभ नहीं , दरअसल अनचाही को अनाछी और अनाछी को अनचाही मान लिया गया था और वही नाम भीरख दिया गया । दरअसल पैदा होते ही इस नन्ही सी बच्ची ने मां को खो दिया था , आया कमला के साथ घर में प्रवेश किया , तब से वो आया ही अनाछी की आइमा थी जो प्यार तो कर सकती थी पर उसके हक़ के लिए लड़ाई नहीं कर सकती ...
आज़ादी
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मुगलो से लेकर अंग्रेज़ों तक..... कई शासकों ने किया इस ज़मीं पर राज..... किसी ने लूटी दौलत तो किसी ने उजाड़ा बसा बसाया समाज। लेकिन कब तक बाहरी आक्रांता पहनते जीत का ताज़? मां भारती के वीर सपूतों ने बुलंद आवाज़ उठाई ... चारों दिशाओं में फ़िर क्रांति की लहर छाई। गुलामी की बेड़िया टूटी, और फिर आज़ादी की सुबह आई। आज़ाद देश में सबको मिला समानता का अधिकार.... संविधान ने दिया देश को एक नया आकार। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश बनने का हुआ सपना साकार। जहां जनता का राज है, जनता के सिर पर ताज है.... जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए ही निर्धारित हर काज है। ये है आज़ाद हिंदुस्तान की ज़मीं लहराता है जब तिरंगा तो आंखो में होती है नमी यही हमारी पहचान है हमारा देश हमारी शान है अपने देश की सुरक्षा के लिए समर्पित हर हिंदुस्तानी वीर जवान है जय हिंद
छूटता बचपन! बाल मज़दूरी
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Pic curteousy: Google छोटा सा सपना था, पूरी दुनिया में छा जाऊंगा नहीं पता था,शिक्षा और सपना छोड़ पैसे कमाऊंगा शिक्षा मिलती तो आज बड़ा अफसर होता काश मेरे पास भी ये अवसर होता पर ये शायद किस्मत की है बात अपनी तो तकदीर ने ही मारी है लात मेरी मजबूरी ने मुझे उजाड़ा पेट की भूख ने सपना बिगाड़ा ऊपर से महामारी आई कमाई पर भी रोक लगाई आज एक सवाल का देंगे जवाब मेरे छूटे बचपन का कौन देगा हिसाब? #दीक्षा #child_labour #StopChildLabour
Together We Can 💪🤝
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 Be Honest and be Patient in dealing everyday, 🙏🏻 With self_confidence, Hope and Faith we will make our own way...🙌 Besides every dark cloud we could find Sun‘s ray, 🌥 After every dark night comes the bright day🌞 Though it has been long fighting this way , 😷 But we are sure Together we can throw this virus away. ✌ #Deeksha #Selfwritten #togetherwecan #Covid19
उम्मीद मत छोड़ो
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एक पेड़ है, पत्ते नहीं शाखों पर, फ़िर भी अड़ा है, फ़िर बहार आने की उम्मीद में बाहें फैलाए खड़ा है। एक मनुष्य है जो हर परेशानी में टूट जाता है निराशा के साए में सब से, रब से भी रूठ जाता है। लेकिन समझने की है बात, कि वक़्त रुकता नहीं , बदल जाता है। ये वक़्त बदलेगा और फ़िर पुराने दिन आएंगे। देखना हम मिलकर ये जंग जीत जाएंगे। हारेगा कोरोना, जीतेगा भारत🙏 दीक्षा #Covid19 #Hope
कमा लो, कोरोना से!
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कमा लो पैसा, जितना कमाना है, तुम मौत के सौदागर बन जाओ, जिंदगी से खेलो, मौके का हर फायदा उठाओ, Oxygen cylinder दस गुना महंगा बेचो तुम सांस बेच रहे हो कीमत बढ़ा दो, दवाई के दाम दुगने करदो, मत देना आसानी से इंजेक्शन भी भागने दो कराहने दो लोगों को तुमको क्या.... प्लाज्मा तो देने की सोचना भी ना तुम फिक्र करो सिर्फ जेब भरने की। लेकिन याद रखना पैसे से सब खरीद लोगे बस खुद की जिंदगी नहीं खरीद पाओगे, लाख जुटा लो Oxygen Cylinder, लाखों कमा लो, खुद की बारी में एक सांस extra नहीं मिलेगी। ये जिंदगी है साहब किसी का उधार न रखती न छोड़ती। अब भी नहीं समझे तो फिर कब?? दीक्षा