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तुम खुद कहा गुम हो ????

मेरी उमीदगी के हर कोने में तुम हो ....                                             नींदों में तुम हो  ख्वाबो में तुम हो  सपनो में तुम हो  बातो में तुम हो ... जब मेरे ज़हन में तुम हो .. तो दिल पूछना चाहता है..की तुम खुद कहा गुम हो??? नजरो को तेरी झलक का इंतज़ार है . दिल तेरे लिए बेकरार है .... वो अनजाना है अनदेखा है पर फिर भी मुजको उस से प्यार है ... इन आँखों की इनायत बस तुम हो ... पर आँखें पूछती है ..की तुम खुद कहा गुम हो ????       .                          बातो में तुम हो ... बेनीन्दगी  की रातो में तुम हो ... बेमौसमी बरसातो में तुम हो .... सपनो की हर मुलाकातों में तुम हो  इंतज़ार के इस मोड़ पर में तो खड़ी  कब आयेगी मेरे तेरे मिलन की घड़ी .... इंतज़ार की हर आह में तुम हो ...

Kab Milegi Manzil???????????

जाने क्यों ज़िन्दगी की हर राह पर गमो का सैलाब सा आता है नज़र आखिर कब मिलेगी मंजिल हमें ....क्यों हर कदम पर होता है हशर…. हम चले जा रहे है न जाने क्यों क्या सोचकर लगता नहीं कामयाबी मिल जाएगी यूं सोच  सोचकर।। हस्ते रहने की खायी थी कसम पर पीछा नहीं छोड़ते है ये गम ना जाने सहने है और कितने सितम क्या ठोकर खाने के लिए ही है हम  बार बार ये प्रश्न  आता है ज़हन में ... की आखिर कितने गम है उस मंजिल को पाने के रास्ते ? हम सोचा करते थे पा लेंगे हर ख़ुशी मेहनत  के रस्ते पर सोच सिर्फ सोच ही रह जाएगी ..... मंजिल शायद हमे मिल ही जाएगी .... गर ना मिली मंजिल तो बस आस रह जाएगी .. और मंजिल पाने की चाह सपनो तक रह जाएगी ...............