तुम खुद कहा गुम हो ????
नींदों में तुम हो
ख्वाबो में तुम हो
सपनो में तुम हो
बातो में तुम हो ...
जब मेरे ज़हन में तुम हो ..
तो दिल पूछना चाहता है..की तुम खुद कहा गुम हो???
नजरो को तेरी झलक का इंतज़ार है .
दिल तेरे लिए बेकरार है ....
वो अनजाना है अनदेखा है पर
फिर भी मुजको उस से प्यार है ...
इन आँखों की इनायत बस तुम हो ...
पर आँखें पूछती है ..की तुम खुद कहा गुम हो ????
.
बातो में तुम हो ...
बेनीन्दगी की रातो में तुम हो ...
बेमौसमी बरसातो में तुम हो ....
सपनो की हर मुलाकातों में तुम हो
इंतज़ार के इस मोड़ पर में तो खड़ी
कब आयेगी मेरे तेरे मिलन की घड़ी ....
इंतज़ार की हर आह में तुम हो
पर इस भरी दुनिया में तुम खुद कहा गुम हो ???
दीक्षा .....
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