वक़्त की सीख...
जिंदगी कई मोड़ लेती है, उतार चढ़ाव में अक्सर तोड़ देती है। कभी खुशियों का सैलाब आता है, कभी गम के साये में सब छूट जाता है। कभी इतना अच्छा वक़्त आता है, की हर कोई आपका अपना हो जाता है। लेकिन जब वही वक़्त बुरा हो जाता है, अपने परायों का एहसास भी हो जाता है। हंसी के पलों में ठहाके हज़ार लगाते है, बेवक़्त खुशी को बांटने तो सभी चले आते हैं। ज़रा मुसीबत बांट कर देखिये, जो पास लगते हैं वो भी दूर चले जाते हैं। फिर दलीलों और सफाइयों का दौर शुरू होता है, काम ना आने का बहाना तैयार होता है। सबका काम कहीं ना कहीं अटक जाता है, जाने क्यों उस समय वही करीबी कहीं भटक जाता है। पर सच तो यही वक़्त सिखा देता हैं।, जिंदगी की असलियत से रूबरू करवा देता है। बुरे वक़्त में कोई कोई ही काम आता है... कौन अपना? कौन पराया? ये पता चल जाता है।। दीक्षा