उम्मीद मत छोड़ो
एक पेड़ है, पत्ते नहीं शाखों पर, फ़िर भी अड़ा है,
फ़िर बहार आने की उम्मीद में बाहें फैलाए खड़ा है।
एक मनुष्य है जो हर परेशानी में टूट जाता है
निराशा के साए में सब से, रब से भी रूठ जाता है।
लेकिन समझने की है बात,
कि वक़्त रुकता नहीं , बदल जाता है।
ये वक़्त बदलेगा और फ़िर पुराने दिन आएंगे।
देखना हम मिलकर ये जंग जीत जाएंगे।
हारेगा कोरोना, जीतेगा भारत🙏
दीक्षा
#Covid19 #Hope

Comments
Post a Comment