आज ना जाने क्यों अश्क से नाता बनता सा जाता है
शायद कुछ खो दिया हमने जिसे दिल चाहता है
ज़िन्दगी अधूरी सी लगती है हर दम इस कदर
की बस आँखों को चाहत सी बन गई देखेने  को इक नज़र
जब जब दिल ने आवाज़ लगाई थी तुझे
प्यार का हर दिया हवा से लगता जेसे अब बुझे
ज़िन्दगी में जो चाहत किस्मत से आई थी
वो तो अब आंसुओ के साए में  छाई  थी
मै चलती रही ज़िन्दगी में कदम बडाये
बस एक उम्मीद है की अब मंजिल मिल जाए
पाने से पहले खोने का डर अब ख़तम हो गया
बस ख़ुशी की आस में जीना भी सितम हो गया...

दीक्षा ....

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