गम - ऐ - ज़िन्दगी

            
दर्द सहते है हम फिर भी चुप चाप सह लेते है हर सितम ...
ना जानते थे की ज़िन्दगी देती है इतने गम ...
हस्ते हुए चले जा रहे है हम 
बस यही सोचते है अब की कब होंगी परेशानिया कम।


आवाज़ दी पलट कर किस्मत को हमने 
पर चोर नहीं दमन मेरा गम ने 
जाने कैसा दर्द है जिसने 
हम किया है असर की आँखें रहती है नम ...
बस यही सोचते है अब की कब होंगी परेशानिया कम।


चलते जा रहे है उस रस्ते जिसकी कोई मंजिल नहीं 
मंजिल तक पहुंचना है खाकर ठोकर ही सही 
टूटना नहीं है थकना नहीं है चलते जाना है 
चाहे दे ये ज़िन्दगी जितने मर्जी सितम 
बस यही सोचते है अब की कब होंगी परेशानिया कम।

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